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UPS In Hindi के इस आर्टिकल में,UPS क्या है ?कैसे काम करता है ? Uninterrupted Power Supply – UPS के प्रकार, On Line ups, off line ups, ups checklist और मेंटेनन्स के बारेमे विस्तार से समजाया है। आशा है ये आपके लिये मददगार होगा।


UPS In Hindi

 

 


What is UPS ? UPS क्या है ? 

 

Uninterrupted Power Supply (UPS) – इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट से बना हुआ एक स्टैटिक उपकरण है। जब पावर सप्लाई फ़ैल होता है या वोल्टेज एबनॉर्मल होता है, तब बिना किसी इंट्रप्शन के बैटरी बैक उप से पावर की पूर्ति करता है। इसे UPS कहते है।

 

किसी भी आर्गेनाइजेशन, संस्था या घरो में इलेक्ट्रिकल पावर का कनेक्शन होता है। जब ये इलेक्ट्रिकल पावर फ़ैल होता है तब इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले सारे उपकरण बंध हो जाते है। इसमें कुछ उपकरण ऐसे होते है जो अचानक बंध हो जाने से हमें नुकशान होता है।

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उद्योगिक एकमो में, हॉस्पीटलमे, सिनेमाघरमे स्टैंड बाय पावर के तोर पे जनरेटर इस्तेमाल होता है। पर स्टैंडबाय पावर और UPS पावर में अंतर है।

स्टैंडबाय पावर ये मेईन पावर सप्लाई फ़ैल होने के बाद जनरेटर चालू करके लाइन में सप्लाई लिया जाता है। यहां पावर के बिच में ऐसा समय भी होता है की वहा बिजली न हो। जिसे ब्लैकआउट कहा जाता है।

 

Full Form Of UPS -:

UNINTERRUPTED POWER SUPPLY

 

UPS पावर सप्लाई को ब्रेक नहीं होने देता। यहाँ तक की हमारी ऑफिस में UPS सप्लाई है, और पावर फ़ैल होता है तो हमें पता भी नहीं चलेगा। इसीलिए, इसे Uninterrupted power supply कहते है।

जैसे की हमारे पास कंप्यूटर है पर इसमें UPS नहीं लगा है। जब हम उसमे काम करते है उसी वक्त यदि पावर फ़ैल होता है तो उसका डाटा जा सकता है। पावर के फ्लक्चुएशन में भी यदि PC बंध हो जाता है तो ये नुकशान हो सकता है।

फैक्टरी में UPS(Uninterrupted Power Supply) का इस्तेमाल ज्यादा होता है। यदि प्लांट में  DCS और PLC जैसी सिस्टम है तो यहां UPS सप्लाई जरुरी है। क्युकी,पुरे प्लांट का कंट्रोलिंग यहाँ से होता है। प्लांट का बिजली सप्लाई विफल होता है तो DCS Scada से ही इसे कन्ट्रोल किया जाता है।

होस्पिटल में ups का पावर होना बहुत जरुरी है। ऑपरेशन थिएटर में कोई पेशन्ट का ऑपरेशन चल रहा हो और ऐसे टाइम पे बिजली विफल हो जाये तो मुसीबत हो जाती है। इसीलिए, होस्पिटल में UPS पावर रहता ही है।

प्लांट की लाइटिंग बहुत जरुरी है। रात के समय में लाइट का महत्व हम सब समझते है। प्लांट में अलग अलग प्रक्रिया में अलग-अलग ऑपरेशन होते है। ऐसे में इमर्जेन्सी लाइट लगाई जाती है। जो Uninterrupted Power Supply से कनेक्ट होती है। 

 

इसके अलावा प्लांट में कही ऐसे उपकरण होते है जिसको पावर फ़ैल का इफ़ेक्ट नहीं होना चाहिए। ऐसी जगह पे भी UPS(Uninterrupted Power Supply) का इस्तेमाल होता है।

 

UPS सिलेक्शन कैसे करे।

 

1 – हमें कितने समय का बैकअप पावर चाहिए।

2 – कितना लोड करंट रहने वाला है।

3 – UPS का लोकेशन कहा रहेगा।

4 – हमें कोनसे उपकरण को बैकअप पावर देना है। उपकरण की क्रिटिकालिटी।

5 – हमारा बजट कितना है।

UPS का रेटिंग VA और KVA में होता है। क्युकी, लोड का पावर फैक्टर फिक्स नहीं होता।

VA का मीनिंग है वाल्ट*एम्पेयर।

KVA ये VA का बड़ा एकम है। किलो वाल्ट एम्पेयर।

 

हमारे घर के लिए जो इन्वर्टर का इस्तेमाल होता है, वो आमतौर पे 800AV से 1000VA की कैपेसिटी होती है। इससे हम 8 से 10 घंटे तक चार फैन और चार 10W का लाइट चला सकते है।

इलेक्ट्रिकल सिस्टम में पावर की विफलता कही कारणों से हो सकती है। जिसे की वोल्टेज  स्पाइक आना। वोल्टेज में सर्ज का असर होना। वोल्टेज डीप होना। और हार्मोनिक का असर होना। ये सभी कारण इलेक्ट्रिकल उपकरण को नुकशान पंहुचा सकते है।

जिसका सीधा असर उत्पादन पे होता है। इलेक्ट्रिकल पावर से चलने वाले क्रिटिकल उपकरण कांस्टेंट पावर सप्लाई के लिए UPS (Uninterrupted Power Supply) का इस्तेमाल किया जाता है।

इसकी ज्यादा जरुरत ओद्योगिक एकमो में प्रोसेस को कंटिन्यू चलाने के लिए होता है। मेडिकल सर्विस में होता है। टेलिकम्युनिकशन में होता है। कम्प्यूटर्स के डाटा सिस्टम बनाय रखने के लिए होता है। और आईटी नेटवर्क लाइव रखने के लिए होता है।

UPS सिस्टम से निरंतर सही पावर की सुनिश्चितता होती है। इसीलिए इसका इस्तेमाल Emergency Power के लिए किया जाता है।

 

Types Of UPS – UPS के प्रकार

 

UPS के मुख्य तीन प्रकार है।

 

1 – Standby  UPS (Off Line UPS)

2 – लाइन इंट्रक्टिव यूपीएस – Line Instructive UPS

3 – ऑन लाइन यूपीएस – Online UPS

 

फेज के आधार पे दो प्रकार के यूपीएस होते है।

1 – सिंगल फेज यूपीएस

2 – थ्री फेज यूपीएस

 

बैटरी के प्रकार एवं उपयोग

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Standby UPS (Off Line UPS In Hindi)

 

स्टैंडबाय UPS(Uninterrupted Power Supply) को ऑफ़ लाइन यूपीएस भी कहा जाता है। इस प्रकार के यूपीएस ज्यादातर PC के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ये एक बेसिक UPS है। जिसमे सर्ज प्रोटेक्शन और बैटरी बैकअप रहता है। हम निचे दिये गये UPS के डायग्राम में देख सकते है।

 

Off Line UPS In Hindi

 

जिसमे इनकमिंग पावर 230 वाल्ट है,या ने ये एक सिंगल फेज UPS है। मेईन स्विच के आउटपुट से दो लाइन निकलती है। एक लाइन स्टैटिक स्विच के “NC” कॉन्टैक्ट से होकर सीधा लोड से कनेक्ट होता है।

याने ऑफ लाइन यूपीएस में नार्मल स्थिति में कनवर्टर,बैटरी,चार्जर,इन्वर्टर कुछ लाइन में नहीं होता। सप्लाई सीधा उपकरण को मिलता है।

मेईन स्विच से दूसरी लाइन निकलती है वो कनवर्टर में जाती है। जहां रेक्टिफायर यूनिट होता है। वहां AC सप्लाई DC में कन्वर्ट होता है। रेक्टिफायर से DC सप्लाई बैटरी चार्जर को मिलती है। जहा से बैटरी चार्ज होती है।

बैटरी का आउटपुट DC सप्लाई है। हम जो उपकरण में उपयोग करते है वो सप्लाई AC होता है, इसीलिए बैटरी से मिलने वाले DC को AC में कन्वर्ट करना पड़ता है। DC सप्लाई को AC में कन्वर्ट करने के लिये इन्वर्टर लगा रहता है।

 

इन्वर्टर के आउटपुट से मिलने वाला AC सप्लाई स्टैटिक स्विच के ‘NO’ कांटेक्ट में जाता है। जब मेईन पावर फेइल होता है, तब स्टैटिक स्विच का कांटेक्ट चेंज हो जाता है।

‘NO’ कॉन्टैक्ट ‘NC’ हो जाता है जहासे बैटरी का बैकअप मिलता है। यही बैटरी का बैकअप इन्वर्टर से AC में कन्वर्ट होके हमें उपकरण में मिलता है।

ऑफ लाइन यूपीएस में सर्ज प्रोटेक्शन रहता है जो सर्ज के समय में प्रोटेक्ट करता है।

 
 
Advantage Of OFF LINE UPS

 

1 – ऑफ़ लाइन यूपीएस कीमत में सस्ता होता है।

2 – इसमें बैटरी का चार्जर सतत कार्य रत नहीं रहता इसीलिए, इसकी कार्य क्षमता अच्छी होती है।

3 – OFF LINE UPS की सर्किट बहुत सिंपल रहती है। जिसे आसानीसे समझ सकते है।

 

Disadvantage Off Line UPS

 

1- मेईन पावर लाइन से सीधा उपकरण कनेक्ट होता है इसीलिए, वोल्टेज वेरिएशन स्पाइक, सर्ज से प्रोटेक्शन नहीं मिलता।

2 – पावर फेइल होता है तब,बैटरी बैकअप इन्वर्टर पे ट्रान्सफर होने में समय लगता है।

3 – ऑफ़ लाइन यूपीएस को हम परफेक्ट Uninterrupted Power Supply नहीं कह सकते।

 

OFF LINE UPS USE

 

1- कंप्यूटर,प्रिंटर स्कैनर में ऑफ़ लाइन यूपीएस सप्लाई का इस्तेमाल होता है।

2 -इमेरजेंसी पावर में लाइटिंग और EPBAX में इस्तेमाल होता है।

 

What is online UPS

 

ON LINE UPS In Hindi

ये UPS को हम परफेक्ट Uninterrupted Power Supply कह सकते है।

इस प्रकार के UPS लोड के साथ कनेक्ट होने के बाद हम निश्चिन्त हो सकते है।

पावर सप्लाई फ़ैल हो, वोल्टेज फ्लक्चुएशन हो ,सर्ज हो या स्पाइक इसका असर नहीं होता। ये UPS हमें किसी भी तरह की बाधा के बगैर किसी भी तरह के अवरोध के बगैर निरंतर और सटीक आउटपुट देता है।

 

On Line UPS In Hindi

 

 

इस प्रकार के UPS में बैटरी हमेशा लाइन में रहती है। इसमें चेंज ओवर के टाइम में स्टैटिक स्विच के कांटेक्ट की जरुरत नहीं होती। बैटरी चार्जर भी लाइन में ही रहता है। AC TO DC कनवर्टर,बैटरी,इन्वर्टर के बाद लोड कनेक्ट होता है।

ये पूरी सर्किट लाइन में रहने से इस प्रकार ups का तापमान बढ़ता है। इसीलिए इसे ज्यादातर एयर कंडीशनर रुम में रखा जाता है।

Online UPS में बाईपास स्विच भी रहता है। यदि यूपीएस में इंटरनल कोई खामी आती है तो, ऐसी स्थिति में लोड बाईपास स्विच पे चला जायेगा। पर ब्रेक डाउन नहीं होगा।

 

Advantages of Online UPS

 

1 – इस प्रकार के ups में मेईन सप्लाई और लोड के बिच में आइसोलेशन स्विच होता है। जरुरत पडने पर बंध करके काम कर सकते है।

2 – लोड सतत इन्वर्टर से मिलता है,इसीलिए वोल्टेज में किसी तरह बदलाव नहीं होता।

3 – पावर फ़ैल के टाइम में लोड ट्रान्सफर होने में प्रेक्टिकली जीरो टाइम लगता है। याने किसी भी तरह का interruption के बिना लोड ट्रान्सफर होता है।

4 – इस प्रकार के यूपीएस में किसी भी तरह के स्पाइक,सर्ज,ब्लैकआउट या बर्न होने से भी आउटपुट कॉन्स्टन्ट मिलता रहता है।

5 – UPS में यदि कोई खामी होती है तो बाईपास से ये चालू हो जाता है।

6 – वोल्टेज रेग्युलेशन बहुत अच्छा है। किसी भी तरह के फ्लक्चुएशन का असर नहीं होता।

 

Disadvantage of Online UPS

 

1 – ऑनलाइन यूपीएस ये ऑफ लाइन यूपीएस से किम्मत में मेंहगा होता है।

2 – इन्वर्टर सर्किट सतत लोड के लाइन में रहने से कार्यक्षमता कम होती है।

3 – रेक्टिफायर,इन्वर्टर,बैटरी और चार्जर ये पूरी सर्किट लाइव रहने से उसका पावर कन्सुम्प्शन बढ़ जाता है।

4 – ऑनलाइन यूपीएस की सर्किट थोड़ी जटिल होती है इसीलिए,समस्या ढूंढने में समय लगता है।

5 – रुम का तापमान मेन्टेन करना पड़ता है।

 

Application of Online UPS

 

1 -होस्पिटल के ICU (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में यूज़ होता है।

2 -होस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर में उपयोग किया जाता है।

3 -कंटिन्यू प्रोसेस प्लांट में मोटर और VFD जैसे उपकरण चलाने के लिए।

4 -DCS (डिजिटल कन्ट्रोल सिस्टम) और PLC (प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोल) में उपयोग किया जाता है।

 

Line Interactive UPS 

 

Line  interactive ups ये एक टाइप का ऑफ लाइन यूपीएस ही है। इस प्रकार के ups में मेईन पावर सप्लाई के बाद AVR का कार्ड लगा रहता है। ये कार्ड वॉल्ट्ज को रेग्युलेट करता है।

यदि इनकमिंग वोल्टेज में फ्लक्चुएशन हो,अंडर या ओवर वोल्टेज हो तो ऐसी स्थिति में ये AVR वोल्टेज को रेग्युलेट करता है। और जो सेटिंग हमने की है वही सेटिंग के अनुसार हमें आउटपुट में वोल्टेज मिलते है।

 

Interactive UPS In Hindi

 

UPS Preventive Maintenance – UPS Check list

 

Daily check up

 

1 – इंडस्ट्रीज में बड़ी कैपेसिटी के यूपीएस होते है जिनका पैरामीटर का रीडिंग हररोज चेक  जाता है। यदि कोई Abnormality लगे तो एक्शन लिया जाता है।

 

Quarterly

 

1 – Visual Inspection किया जाता है। जिसमे कोई बर्निंग स्मेल, कनेक्शन टाइटनेस,इंसुलेशन और केबल ओवर हीट चेक किया जाता है।

 

Semi-annually 

 

Visually check किया जाता है।

बैटरी और कपैसिटर का लीकेज चेक किया जाता है।

पुरे ups को वैक्यूम और कॉटन वेस्ट से साफ किया जाता है।

रुम के तापमान को मेन्टेन करने वाले Air Conditioner चेक किया जाता है।

 

Annually

 

1 – UPS का थर्मल स्कैनिंग किया जाता है। सभी इलेक्ट्रिकल कनेक्शन एवं कंट्रोल कार्ड का तापमान चेक किया जाता है। यदि कोई समस्या है तो उसे ठीक किया जाता है।

2 – Uninterrupted power supply का पूरा ऑपरेशन टेस्ट किया जाता है। मेईन पावर आइसोलेट करके बैटरी बैकअप चेक किया जाता है। हरएक सेल लोड टेस्टर से चेक किया जाता है।

3 – ups ट्रान्सफर स्विच,मेंटेनन्स बाईपास स्विच और सर्किट ब्रेकर के प्रोटेक्शन चेक किया जाता है।

4 – बैटरी टर्मिनल लिंक के कनेक्शन टाइटनेस और कंट्रोल कनेक्शन टाइटनेस चेक किया जाता है।

 

UPS बैकअप कैलकुलेशन कैसे करते है।

 

UPS बैटरी बैकअप कैलकुलेशन करने का फोर्मुला : C=(P *T)/(V *n *k)

C = बैटरी कैपेसिटी,यूनिट एम्पेयर*ऑवर (AH)
P = लोड पावर,यूनिट वोट (W )
T = बैटरी बैकअप टाइम,यूनिट अवर (H)
V = बैटरी वोल्टेज,यूनिट वाल्ट (V)
n = इन्वर्टर इफिसिएन्सी
k = बैटरी डिस्चार्ज रेशियो

बैटरी बैकअप टाइम जितना ज्यादा होगा इतनी कार्यदक्षता अच्छी रहती है।

उदहारण के तोर पे

जरुरी बैटरी की कैपेसिटी C =(8000 W*1)(12V *6 *0.92 *0.6)= 75 AH

यहाँ पे हम 100AH का बैटरी का सिलेक्शन कर सकते है। जहा हमें 1 घंटे से ज्यादा बैकअप मिल सकता है।

 

name of company ups- Emerson, Hi-ral, APC etc.

name of battery make- Exide,Emron etc.

UPS In Hindi – Uninterrupted Power Supply के इस आर्टिकल में यूपीएस से जुडी जानकारी है। इसके अलावा भी यदि कोई प्रश्न है तो हमें कमेन्ट बॉक्स में लिख सकते हो।

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