Types of Gear Box Hindi- गियर बॉक्स क्या है ?

गियर बॉक्स मैकेनिकल मशीनरी उपयोग होने वाली एक रचना है । यहाँ हम गियर बॉक्स के प्रकार ( Types of Gear Box Hindi) . गियर बॉक्स क्या है ? गियर बॉक्स का फक्शन किस तरह होता है ? कोनसा गियर बॉक्स का उपयोग कहा किया जाता है ? इसे विस्तार से समझेंगे।

 

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2 Types of Gear Box Hindi – गियर के प्रकार प्रकार

Whar is Gears ? गियर बॉक्स क्या है ?

गियर एक सुदर्शन चक्र की तरह दिखने वाला उपकरण है।ये घूमती हुई मशीनो का एक भाग है। गोलाकार गियर के ऊपर धारदार टीथ (दांता ) होता है।
एक से ज्यादा गियर याने गियर बॉक्स का उपयोग शक्ति, पावर का ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है। इससे उपकरण की गति ( Speed ), Tourqe और डायरेक्शन में बदलाव ला सकते है।

देखा जाये तो गियर बॉक्स एक तरह से मिडल मैन है। हम एक मोटर के गियर बॉक्स को समजे तो मोटर इलेक्ट्रिसिटी से घूमती है। मोटर के शाफ़्ट के साथ गियर बॉक्स को जोड़ा जाता है। और गियर बॉक्स के साथ उपकरण को जोड़ा जाता है।

केमिकल इंडस्ट्रीज में वेसल या रिएक्टर जैसे उपकरणों में इस प्रकार की प्रणाली होती है। जिसमे इलेक्ट्रिक मोटर और स्टर्रर के बीचमे गियर बॉक्स का इस्तेमाल होता है। मोटर की स्पीड को गियर बॉक्स कम करके स्टार्रर को चलाया जाता है।

गियर बॉक्स की साइज के अनुशार शक्ति ( Tourq ) और गति कम ज्यादा कर सकते है।

 

Types of Gear Box Hindi

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गियर बॉक्स कैसे काम करता है ? How work Gear Box

एनर्जी को को उत्पन्न नहीं किया जा सकता। इसे एक रूप से दूसरे रूप में ट्रांसफर किया जा सकता है। या ट्रांसमिट किया जा सकता है। गियर बॉक्स का काम एनर्जी को ट्रांसमिट करना है।

गियर बॉक्स का कम्पलीट फक्शन हम ऑटोमोबाइल की एक कार से समजते है। किस तरह गियर बॉक्स काम करता है और एक गति शील उपकरण में ये कियना महत्व का रोल अदा करता है।

एक फ्यूल से चलने वाली कार में इंजन होता है। इंजिन को चलाने का स्तोत्र फ्यूल है। फ्यूल के दहन से इंजिन चलता है।

कार में इंजिन और कार को दौड़ने वाले व्हील के बीचमे गियर बॉक्स होता है। जो कार की गति एवं टॉर्क को कण्ट्रोल करता है।

हम अक्षर सीधे रास्ते पर कार को चलाते है, तो हमारा गियर टॉप पोजीशन में होता है। यहाँ हमें स्पीड की जरुरत है और टॉप गियर में सबसे ज्यादा स्पीड मिलती है।

दूसरी तरफ हमें कोई ऊंचाई वाला रास्ता पार करना है, तो हम अक्षर गियर को पहले या दूसरी पोजीशन में ले लेते है। यहाँ हमें स्पीड की नहीं, बल की जरुरत है। टॉर्क की जरुरत है। जो हमें पहले या दूसरी पोजीशन में मिलता है।

कार में एक गियर रिवर्स भी होता हैं। हम उस पोजीशन पे गियर रखते है तो गाड़ी रेवेर्स चलती है। ऐसी स्थिति में गियर बॉक्स का डायरेक्शन चेंज हो जाता है।

गियर बॉक्स में टॉर्क और गति का नियंत्रण हम हमारी जरूरियात के हिसाब से कर सकते है।

 

Main Fuction of Gear Box

गियर बॉक्स के तीन मुख्य कार्य है। जो निचे दिये गए है।

याद रहे – सिर्फ एक सिंगल गियर कोई काम का नहीं होता। टीथ वाला एक चक्र के साथ दूसरा एक या एक से ज्यादा गियर चाहिए, तभी हम आउटपुट ले पाएंगे।

एक से ज्यादा गियर मिलते है, उसे गियर ड्राइव कहते है। गियर ड्राइव से ही हम किसी भी मशीन का आउटपुट ले सकते है।

1 – टॉर्क ( शक्ति ) को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थापित करना और टॉर्क को बढ़ाने का काम करता है।

2 – शाफ़्ट की गति की दिशा बदल शकता है। याने क्लॉक वाइज घूम रहे मशीन को एंटीक्लॉक वाइज घुमा सकते है। कार को रिवर्स और फॉरवर्ड चलना एक बेहतरीन उदाहरण है।

3 – उपकरण की स्पीड को बदल सकता है। गियर रेशियो के अनुशार हम गति (RPM) कम या ज्यादा कर सकते है।

गियर बॉक्स में टॉर्क ( बल ) और स्पीड ( गति ) इन्वेर्सली प्रपोसनल है। जब टॉर्क बढ़ाया जाता है तो, स्पीड कम होती है। और जब स्पीड बढ़ती है तो, टॉर्क कम होता है।

 

Types of Gear Box Hindi – गियर के प्रकार प्रकार

हमने गियर का नाम जरूर सुना होगा। गियर एक टेक्निकल लाइन का शब्द है। गियर बहुत सारे प्रकार के होते है। हम गियर के हर एक प्रकार के बारेमे विस्तार से समझेंगे।

मटेरियल के आधार पर, घूमने की दिशा के आधार पर, गियर के टीथ (दाता ) के आधार पर, शाफ़्ट लगाने की दिशा के आधार पर अलग – अलग प्रकार है। जिसे निचे के टेबल से हम समज सकते है।

 

दांतो की रचना के आधार पर गियर के प्रकार पेरेलल और नॉन इंटेरसेक्टिंग शाफ़्ट के आधार पर प्रकार नॉन पेरेलल और इंटेरसेक्टिंग शाफ़्ट के आधार पर गियर के  प्रकार नॉन पेरेलल एंड नॉन इंटेरसेक्टिंग के आधार पर गियर के प्रकार
एक्सटर्नल गियर स्पुर  गियर स्ट्रैट बेवेल गियर वर्म गियर
इंटरनल गियर हेलिकल गियर स्पाइरल बेवेल गियर हायपोइद गियर
  डबल हेलिकल गियर मिटेर बेवेल गियर स्केव गियर
  हेरिंगबोन गियर   रैक एंड पिनियन गियर

 

Gears Types and Their Application

 

1- दातो की रचना के आधार पर प्रकार-

 

External Gear

एक्सटर्नल का मीनिंग होता है, बहार की साइड। गियर एक राऊंड चक्र है। जिस गियर में बहार की साइड ( oursite ) दाता ( टीथ ) है, उसे एक्सटर्नल गियर कहा जाता है। निचे दिए दये पिक्चर में आप एक्सटर्नल गियर देख सकते है।

एक्सटर्नल गियर में दो गियर कनेक्ट किया जाता है तो, एक दूसरे के विरुद्ध दिशामे घूमते है।

 

Internal Gear

इंटरनल का मीनिंग होता है, अंदर के साइड। गियर के दाता ( Teeth ) अंदर की तरह होता है उसे इंटरनल गियर कहते है। इस प्रकार के गियर को रिंग गियर भी कहा जाता है। निचे दिए गए पिक्चर में आप इंटरनल गियर सकते है।

इंटरनल गियर में दो गियर को कनेक्ट किया जाये तो, दोनों गियर क्लॉक वाइज दिशामे घूमते है।

 

Types of Gear Box Hindi

Types of Gear box Hindi

 

2 – पैरेलल एंड नॉन इंटरसेप्टिंग शाफ़्ट- Basis of shaft Direction Types of Gear Box Hindi

 

गियर बॉक्स ( Gear Box) के दोनों शाफ़्ट एक दूसरे के समांन्तर रहते हो, एक दूसरे को क्रॉस न करते हो, ऐसे गियर ड्राइव को पेरेलल एंड नॉन इंटरसेप्टिंग शाफ़्ट एक्सियल गियर कहा जाता है।

गियर बॉक्स की शाफ़्ट आगे जाके एक दूसरे की शाफ़्ट को क्रॉस नहीं करता इसे नॉन इंटरसेप्टिंग कहा जाता है।

इस प्रकार के गियर में स्पुर गियर, हेलिकल गियर, डबल हेलिकल गियर और हेररिंगबोन गियर आते है।

 

A – Spur Gear- स्पुर गियर

स्पर गियर( Spur Gear) में गियर का दाता शाफ़्ट की समान्तर होता है। स्पर गियर में दाता ( teeth ) एक डैम सीधा रहता है।
इस प्रकार के गियर का इस्तेमाल साधारण ( माध्यम ) स्पीड में बहुत अच्छा आउटपुट देता है। जहा गति बढ़ जाती है वहा ये बहुत जयदा आवाज काटने लगता है।

इस प्रकार के गियर से स्पीड को ज्यादा या कम कर सकते है । इस प्रकार के गियर का उपयोग वाशिंग मशीन, मिक्सचर मशीन, बॉल मिल , पंप विगेरे उपकरण में इसका उपयोग होता है ।

 

B – Helical Gear- हेलिकल गियर

हेलिकल गियर( Helical Gear) में दाता स्पर गियर की तरह सीधा नहीं होता। टीथ ( दाता ) एक एंगल या एक डिग्री के तहत बनाया जाता है। दाता की डिग्री हमारी जरुरत के आधार पर रखा जाता है। 20 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तक तक एंगल में बनाये जाते है।

इस प्रकार के गियर को जब पैरेलल शाफ़्ट में कनेक्ट किया जाता है, तब इसे हेलिकल गियर कहते है। पर इसे यदि नॉन पैरेलल शाफ़्ट पर इन्सटाल्ड करते है, तो इसे स्पर गियर कहते है।

हेलिकल प्रकार के गियर का उपयोग ज्यादा टॉर्क के लिए उपयोग किया जाता है।
ये गियर बहुत कम आवाज करता है, इसीलिए इसे साइलेंट ऑपरेशन में इसका उपयोग होता है।

हेलिकल गियर का उपयोग प्रिंटिंग मशीन, रोलिंग मिल, टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज, फ़र्टिलाइज़र इंडस्ट्रीज जैसी जगह पे किया जाता है।

 

C – Double Helical Gear- डबल हेलिकल गियर

डबल हेलिकल गियर सिंगल हेलिकल गियर की तरह ही होता है। सिंगल रचना को दुगनी की जाती है, इसीलिए इसे डबल हेलिकल गियर कहते है। इस प्रकार के गियर में शाफ़्ट के ऊपर दो एंगल में दाता होता है।

सिंगल हेलिकल गियर की तुलना में डबल हेलिकल में ज्यादा टॉर्क मिलता है। इसका उपयोग हम एक्सियल थ्रस्ट को कम करने के लिए किया जाता है।

डबल हेलिकल गियर(Double Helical Gear) का उपयोग गैस टरबाइन, पावर ट्रांसमिशन, जनरेटर परिमूवर , कंप्रेसर, और मरीन ड्राइव में किया जाता है।

 

D – HerringBone Gear- हेररिंगबोन गियर

हेररिंगबोन गियर देखने में डबल हेलिकेन गियर की तरह ही दीखता है। पर यहाँ बहुत बड़ा अंतर है। डबल हेलिकल गियर में दोनों teeth के बीचमे गैप होता है। जब की हेररिंगबोन गियर के टीथ में गैप नहीं होता।

इस प्रकार के गियर की रचना बहुत कम्प्लीकेटेड और स्पेशल है। इसीलिए इसे स्पेशल केस में ही इस्तेमाल किया जाता है।

हेररिंगबोन गियर का सिंगल रोड ( Bar ) ही दोनों तरफ के teeth का एंगल बनाते है। इस प्रकार का गियर हाई लोड पे काम करता है। और इसके रोटेशन से हेलिकल की तुलना में आवाज भी कम होता है।

मैकेनिकल पावर ट्रांसमिशन की दुनिया में गियर बॉक्स से बहुत बड़ा रेवोलुशन हुआ है।  गियर को रोटेट करने वाला कोई भी मोटर या इंजन एक गियर को रोटेट करता है। एक गियर दूसरा गियर को घुमाता है। गियर का मुख्य काम पावर ( बल ) का ट्रांसमिशन करना और स्पीड को बदलना है।

 

3 – नॉन पेरेलल एंड इंटेरसेक्टिंग शाफ़्ट एक्सियल

नॉन पेरेलल मतलब जो समांन्तर नहीं है। इसमें शाफ़्ट का एक्सियल एक दूसरे के क्रॉस होता है। इसीलिए इसे नॉन पेरेलल इंटेरसेक्टिंग शाफ़्ट एक्सियल कहा जाता है।

इस प्रकार में स्ट्रेट बेवेल गियर, स्पाइरल बेवेल गियर और मिटेर बेवल गियर होता है।

 

A – Stright Bevel Gear- स्ट्रैट बेवेल गियर

बेवल गियर की रचना और कार्य पद्धति थोड़ी अलग होती है। इसमें दोनों गियर की शाफ़्ट एक दूसरे को 90 डिग्री पर क्रॉस होती है।

इस प्रकार के गियर में टीथ ( दाता ) शाफ़्ट के समांन्तर सीधा होता है। किसी डिग्री में नहीं होता। इसीलिए इसे Straight Bevel Gear कहते है।

इस प्रकार के गियर का उपयोग 90 डिग्री पर पावर को ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है।

Straight Bevel Gear की खासियत यह है की, इसमें हम 0 to 180 “C तक पावर ट्रांसमिट कर सकते है।

 

B -Spiral Bevel Gear- स्पाइरल बेवेल गियर

स्ट्रैट बेवेल और स्पाइरल गियर का उपयोग लगभग एक जैसा ही है। इसमें मुख्य अंतर दाता ( Teeth ) की रचना में। स्ट्रैट बेवेल में दाता सीधा होता है। जबकि स्पाइरल गियर में दाता की रचना कम्प्लीकेटेड होता है। एक एंगल से बनाया जाता है।

स्ट्रैट बेवल गियर की तुलना में इसमें वाइब्रेशन कम होता है। और आवाज भी कम होता है। इस प्रकार के गियर बॉक्स जहा हाई स्पीड और हाई टॉर्क की जरुरत होती है वहां किया जाता है।

 

C – Miter Bevel Gear- मिटेर बेवेल गियर

मिटेर बेवेल गियर दिखने में स्ट्रैट बेवेल गियर की तरह ही होता है। इसमें भी टीथ की रचना सीधी होती है। गियर की शाफ़्ट एक दूसरे को 90 डिग्री पे क्रॉस करती है।

मिटेर बेवेल गियर में दोनों गियर की टीथ ( दाता ) की संख्या सेम होती है। और ये गियर सिर्फ 90 डिग्री पर ही पावर का ट्रांसमिशन कर सकता है।

मिटेर बेवेल गियर का उपयोग कूलिंग टावर, लोकोमोटिव, पावर प्लांट, स्टील प्लांट और रेलवे ट्रैक इंस्पेक्शन मशीन में होता है।

 

4- नॉन पेरेलल एंड नॉन इंटेरसेक्टिंग शाफ़्ट गियर

 

नॉन पेरेलल एंड नॉन इंटेरसेक्टिंग गियर ,इसकी शाफ़्ट समांतर में भी नहीं है और एक दूसरे के साथ क्रॉस भी नहीं हो रही है।
इसमें चार प्रकार के गियर होते है।

A- Worm Gear- वर्म गियर

प्रकार की गियर ड्राइव बाकि गियर की तुलना में अलग ही नजर आती है। इसमें गियर शाफ़्ट पेरेलल भी नहीं होती और इंटेरसेक्टिंग भी नहीं होती।

इस प्रकार के गियर ड्राइव (Gear Drive) में एक गियर टीथ के ऊपर दूसरे गियर की शाफ़्ट रहती है।

वर्म गियर का उपयोग से पावर ट्रांसमिशन 90 डिग्री सकते है। गाय भैंस के लिए घास काटने वाली मशीन में इस प्रकार का गियर का इस्तेमाल होता है।

दूसरे प्रकार के गियर की तुलना में इसकी कार्यक्षमता बहुत कम है। इसलिए इसमें एनर्जी कोन्सुम्प्शन ज्यादा होता है।

बहुत ज्यादा स्पीड को कम करना होता है, ऐसी जगह पे इस प्रकार के गियर का इस्तेमाल होता है।

 

B- Hypoid Gear- हायपोइद गियर

हायपोइद गियर वर्म गियर की तुलना में बेहतर है। अच्छी कार्यक्षमता के साथ काम करता है। इसमें पावर ट्रांसमिशन भी अच्छा होता है इसीलिए एनर्जी वेस्ट कम होता है।

इस प्रकार के गियर ड्राइव में भी दोनों की शाफ़्ट ना तो पेरेलल में यूज़ होती है, नहीं एक दूसरे के साथ क्रॉस होती है।

Hypoid Gear प्रकार के गियर का उपयोग ऑटोमोबाइल और ट्रैन में किया जाता है।

 

C – Skew Gear- स्केव गियर

Skew Gear बिलकुल हेलिकल गियर की तरह दीखता है। हेलिकल गियर की शाफ़्ट पेरेलल होती है। पर इसी गियर को शाफ़्ट पेरेलल में न रहे इस तरह फिट किया जाये तो, ये स्कू गियर हो जायेगा।

स्कू गियर की शाफ़्ट एक दूसरे को क्रॉस नहीं करती और पेरेलल में भी नहीं होती।
Skew Gear का उपयोग पावर जनरेशन प्लांट में ज्यादा किया जाता है।

 

D – Rack and Pinion Gear- रैक एंड पिनियन गियर

इस गियर ड्राइव ( Gear Drive) में दो मुख्य भाग है, इसमें घूमने वाला भाग को पिनियन कहा जाता है। और जिस पे गियर ड्राइव करता है, घूमता है उस भाग को रैक कहा जाता है।

रोटरी मोशन को लीनियर मोशन में ट्रांसफर करने के लिए इस प्रकार के गियर का इस्तेमाल होता है।
इस प्रकार के गियर में पिनियन गियर की गति की दिशा बदल के रैक की गति की दिशा बदल सकते है।

इस प्रकार के गियर उपयोग बेल्ट कवेयर, कार स्टेयरिंग में होता है।

मटेरियल के आधार पर गियर बॉक्स ( Gear Box) के प्रकार में प्लास्टिक, स्टील और कास्ट आयरन में गियर बॉक्स बनाया जाता है।

 

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What is Gear Ratio – गियर राशियों क्या है ? Gear Ratio

गियर ड्राइव में दो गियर के घूमते समय एक राउंड पूरा करने के बिच में जो अंतर है। उसे दोनों गियर के उस अंतर को गियर रेश्यो कहते है।
इसे उदाहरण से समझते है।
एक गियर ड्राइव में दो गियर है। दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए है। दोनों के टीथ (दाता ) सेम है, गियर साइज भी सेम है। दोनों गियर एक समय में एक चक्कर पूरा करते है। तो यहाँ गियर का रेशियो 1:1 होगा।
यदि दोनों गियर में से एक गियर बड़ा है और दूसरा गियर छोटा तो रेश्यो अलग होगा।
यहाँ हम समजते है की बड़ा गियर जब एक राउंड घूमता है, उस वक्त छोटा गियर पांच राउंड घूमता है। तो ऐसी स्थिति में गियर रेशियो 1:5 का कहा जाता है।

What is Tourq – गियर टॉर्क क्या है ?

यहाँ हमें समझना होगा की कोई एक गियर घूमता है। यह घूमने वाला गियर दूसरे गियर को घुमाता है। पहला गियर जो दूसरे को घुमाता है यह टॉर्क है। टॉर्क को सीधी भाषा में समजे तो घूमने की ताकत कह सकते है।
गियर की स्पीड कम होगी तो टॉर्क ज्यादा होगा और गियर की स्पीड ज्यादा होगी तो टॉर्क कम होगा।
 

Q- गियर बॉक्स में ब्रिधर का क्या काम है

ब्रिधर गियर बॉक्स की केसिंग के ऊपर फिट होता है। ब्रिधर गियर बॉक्स में एक श्वसन अंग की तरह काम करता है। गियर लगातार घूमने वाला उपकरण है।
इसमें लुब्रिकेशन और हीटिंग होता है। इसके कारण गैस जेनरेट होता है। इस गैस के बहार करने का और बहार की सुकि हवा अंदर लेने का काम करता है। एक तरह से गियर बॉक्स के वेंटिलेशन के लिए ब्रिधर का उपयोग होता है।

Q- गियर बॉक्स में आयल सील का क्या काम है ?
 

आयल सील को गियर बॉक्स शाफ़्ट की दोनों तरफ लगाया जाता है। गियर बॉक्स से आयल लीकेज न हो इसीलिए आयल सील का उपयोग किया जाता है।

Q- मल्टीस्टेज गियर बॉक्स किसे कहते है ?

जिस गियर बॉक्स में गियर की संख्या बहुत ज्यादा होती है, इसे मल्टीस्टेज गियर बॉक्स कहते है। इस प्रकार के गियर में रेश्यो और गियर की संख्या ज्यादा होने के कारण गति कम होती है।
हेलिकल प्रकार के गियर का इस्तेमाल मल्टीस्टेज गियर बॉक्स में होता है।

Q- गियर बॉक्स का उपयोग क्यों किया जाता है ?

गियर बॉक्स के मुख्य दो उपयोग होते है।
1 – गियर बॉक्स स्पीड को ज्यादा या कम कर सकता है।
2 – टार्क ( शक्ति ) को ट्रांसमिट कर सकते है।

Q – इंडस्ट्रीज में वर्म गियर बॉक्स का उपयोग कहा किया जाता है ?

वर्म गियर बॉक्स का उपयोग Conveyor बेल्ट, Elevator, मोनोरेल, लिफ्ट , होइस्ट, विगेरे में किया जाता है।
 

Q- गियर बॉक्स फ़ैल होने के कारण ?

गियर बॉक्स फ़ैल होने के दो मुख्य कारण है।
1 – गियर बॉक्स का लुब्रिकेशन सही नहीं होना।
2 – गियर बॉक्स का ब्रिधर जाम होना, काम नहीं करना।

Types of Gear Box Hindi– के इस आर्टिकल में गियर के प्रकार का वर्णन किया है। गियर बॉक्स क्या है ? कैसे काम करता है ? गियर रेश्यो क्या है ? टॉर्क क्या है ? ये सभी सवालों का जवाब यहाँ मिलेगा । इसके बाद भी गियर बॉक्स से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप कमेंट बॉक्स में लिख सकते हो।

 

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