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यहाँ हम इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाली AC मोटर के बारेमे विस्तार से समझेंगे। इलेक्ट्रिसिटी का जो वपरास है, लोड है इसमें तकरीबन 70 % लोड इलेक्ट्रिक AC मोटर का होता है। AC Motor In Hindi में हम मोटर के प्रकार उसका कार्य सिद्धांत एवं इसका उपयोग के बारेमे जानेगे।


AC Motor In Hindi

AC मोटर याने अल्टेरनेटिंग करंट से चलने वाली मोटर। AC 3 फेज मोटर का इस्तेमाल बहुत बड़े तोर में फैक्टरी में किया जाता है। अलग-अलग जरुरियात आधार पे अलग-अलग प्रकार की मोटर का इस्तेमाल होता है।

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मोटर कितने प्रकार के होते है  – Types of Motor

  • सप्लाई के आधार पे
    AC मोटर
    DC मोटर
  • फेज के आधार पे

1 – सिंगल फेज मोटर

2 – थ्री फेज मोटर

  • काम के आधार पे

1 – सिन्क्रोनस मोटर

2 – इंडक्शन मोटर

  • इंडक्शन मोटर दो प्रकार के होते है।

1 – स्कवीरल केज इंडक्शन

2 – स्लिपरिंग इंडक्शन

 

 

3 PHASE INDUCTION MOTOR

 

स्क्वीरल केज इंडक्शन मोटर

स्क्वीरल केज इंडक्शन मोटर के रोटर का बाह्य देखाव की बजह से उसे स्क्वीरल केज कहते है। squirrel याने गिलहरी जिसकी बॉडी पे जो लाइन दिखती है। जो निशान दीखता है, ठीक वैसा ही रोटर के स्लॉट की लाइन में दीखता है। इसीलिए, इस मोटर को स्क्वीरल केज इंडक्शन मोटर कहा जाता है।

 

इंडक्शन मोटर का कार्य सिद्धांत – Induction Motor Working Principle

 

इलेक्ट्रिक मोटर याने के इलेक्ट्रिसिटी से गुमने वाली मोटर। जो इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट करती है।

इलेक्ट्रिक मोटर फैराडे के इलेक्ट्रो मेग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांत पे कार्य करता है।

जब किसी रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड में क्लोज लूप वाहक रखा जाता है तब, इसमें EMF Induce होता है.और ये गुमने की कोशिश करता है।

मोटर को जब पावर सप्लाई से कनेक्ट किया जाता है तब, विध्युत चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। थ्री फेज मोटर में ये चुंबकीय क्षेत्र रोटेटिंग होता है। जिसे इलेक्ट्रिक भाषा में रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड कहते है।

 

 

 

                3 Phase Induction Motor In Hindi

स्टेटर वाइंडिंग से उत्पन्न हुई रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड रोटर को गति करने के लिए धक्का देती है। एक बार रनिंग स्थिति में आने के बाद रोटेटिंग चुंबकीय क्षेत्र के सहारे रोटर घूमता रहता है।

रोटर साथ मैकेनिकल लोड जुड़ा हुआ रहता है। जहां से हमें मैकेनिकल एनर्जी के रुप में आउटपुट मिलता है।

 

मोटर के मुख्य भाग – Parts of Motor

 

1 – स्टेटर

2 – रोटर

3 – टर्मिनल बॉक्स 

4 – की वे एंड की

5 – बेअरिंग

6 – कूलिंग फैन

7 – फैन कवर

8 – लिफ्टिंग बोल्ट

9 – बेअरिंग कवर

10 – नेम प्लेट

Motor Parts-AC Motor In Hindi

 

 

 

 

 
 
  Motor Stator – स्टेटर
 

स्टेटर मोटर की  स्थिर रचना है और ये तीन भाग से बना है। एक आउटर फ्रेम (बॉडी), स्टेटर कोर और वाइंडिंग। कास्ट आयरन  से तैयार की हुयी फ्रेम स्टेटर कोरे को सपोर्ट करती है।

स्टेटर की कोर में सिलिकॉन स्टील की पत्तिओ से स्टेम्पिंग की जाती है। सिलिकॉन स्टील हिस्टेरिसिस लॉस एवं एड्डी करंट लोस्स को कम करता है।

इंडक्शन मोटर के स्टेटर कोर के ऊपर कॉपर वायर से वाइंडिंग की जाती है। थ्री फेज वाइंडिंग में 6 लीड बहार निकलते है। जिसे टर्मिनल बॉक्स में लाया जाता है। बादमे स्टार या डेल्टा कनेक्शन करके सप्लाई के साथ कनेक्ट किया जाता है।

मोटर की स्पीड स्टेटर के पोल पे आधार रखती है। और वाइडिंग भी इसी हिसाब से किया जाता है। यदि 2 पोल होंगे तो मोटर की स्पीड 3000 RPM की होगी। 4 पोल होंगे तो स्पीड 1500 RPM होगी। और यदि 6 पोल होंगे तो 900 RPM की मोटर होगी।

 

मोटर की स्पीड पोल के इन्वेर्सली प्रपोसनल होती है।

जिसका फार्मूला है  NS =120 F/P

जहा 

NS – सिन्क्रोनस स्पीड (चुंबकीय क्षेत्र की स्पीड)

F – सप्लाई की फ्रीक्वेंसी

P – नम्बर ऑफ़ पोल

 

टर्मिनल बॉक्स में वाइंडिंग के तार के साथ पावर सप्लाई कनेक्ट किया जाता है।

जहा से स्टेटर के वाइंडिंग में बिजली का सप्लाई मिलता है। स्टेटर की तीन फेज की वाइंडिंग 120 डिग्री पे तैयार होती है। जो तीनो फेज मिलाके 360 डिग्री होता है।

उसमे उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र रोटेटिंग होता है। ये गुमने वाला चुंबकीय क्षेत्र रोटर को गुमाता है।

 

Three Phase Motor में स्लिप किसे कहते है ?

सिन्क्रोनस स्पीड (NS) और रोटर स्पीड (NR) में अंतर होता है। सिंक्रोनोस स्पीड याने गुमने वाला चुंबकीय क्षेत्र  स्पीड। रोटर की स्पीड हमेशा सिन्क्रोनस स्पीड से कम होती है।

सिन्क्रोनस स्पीड और रोटर स्पीड  का जो गेप है, डिफरेंट है इसे स्लिप कहते है।

स्लिप = NS – NR

NS-1500 है और NR 1450 है तो।

1500 – 1450 = 50 स्लिप

 

रोटर- Rotor

 

3 Phase Induction Motor का गुमने वाला भाग रोटर है। रोटर में शाफ़्ट के ऊपर सिलिंड्रिकल कोर होती है। इस कोर में बहार की तरफ पेरेलल स्लॉट बने हुए रहते है। इस स्लॉट में कंडक्टर बार को रखा जाता है। कंडक्टर बार कॉपर या अल्लुमिनियम के होते है। इसे स्लॉट में रखने के बाद शार्ट सर्किटेड एन्ड रिंग से कनेक्ट किया जाता है।

रोटर के स्लॉट में रखे गए बार सीधे नहीं होते। थोड़े से क्रॉस में लगाया जाता है।

बार को क्रॉस में लगाने के दो मुख्य लाभ है।

1 – रोटर स्ट्रक होने की संभावना कम हो जाती है।

2 – मोटर में हमिंग आवाज कम  है।

 

टर्मिनल बॉक्स – जहा पावर सप्लाई के केबल कनेक्ट किया जाता है।

कूलिंग फैन – अवितर चलने के कारण मोटर का तापमान बढ़ जाता है। इसे कण्ट्रोल करने के लिए कूलिंग फैन लगाया जाता है।

नेम प्लेट – मोटर में ये बहुत अहम् है।  इसे मोटर की जन्मकुंडली भी कहते है। मोटर की पूरी जानकारी उसपे लिखी रहती है।

बेअरिंग – रोटर शाफ़्ट पे लगते है। जिसके कारण लोड  मोटर गुमती है।

 

क्रोएशिया के साइंटिस्ट निकोला टेस्ला ने मोटर का अविष्कार किया था।

SF6 Circuit Breaker

Star Delta Starter

What is MPCB ?

 

इंडक्शन मोटर का उपयोग 

इलेक्ट्रिकल लोड में सबसे ज्यादा लोड होता है इंडक्शन मोटर का। घर हो या फैक्टरी इंडक्शन मोटर का इस्तेमाल होता है। घरमे फैन, वॉशिंग मशीन, फ्लोर मिल ये सबमे इंडक्शन का मोटर का ही इस्तेमाल होता है।

फैक्टरी में बड़ी तोर पे इंडक्शन मोटर का उपयोग होता है। जिसमे पंप, ब्लोअर, रिएक्टर,वेसल, जैसे मैकेनिकल उपकरण को चलाने के लिए इंडक्शन मोटर का ही इस्तेमाल होता है। जो इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट करता है।

किसी भी मोटर को सलामती पूर्वक कार्यरत करने के लिए स्टार्टर का उपयोग किया जाता है। जिसमे सॉफ्ट स्टार्टर, डाइरेक्ट ओन लाइन स्टार्टर, स्टार डेल्टा स्टार्टर ,रोटर रेजिस्टेंस स्टार्टर और वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव का भी इस्तेमाल होता है

 

स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर – Slipring Induction Motor

 

इस प्रकार की मोटर का कार्यसिद्धांत स्कवीरल केज इंडक्शन मोटर की तरह ही होता है। पर स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर रोटर अलग होता है। इसके रोटर पे भी स्टेटर की तरह वाइंडिंग रहती है। तीन वाइंडिंग के 6 लीड में से तीन को शार्ट करके स्टार बना दिया जाता है।

स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर में स्लिपरिंग का इस्तेमाल होता है इसीलिए, इसे स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर कहते है

रोटर की शाफ़्ट पे स्लिपरिंग होती है। वहा वाइंडिंग के तीन वायर को कार्बन ब्रूस से जोड़ दिया जाता है। जिसे वेरिएबल रेजिस्टेंस से साथ कनेक्ट किया जाता है।

जब स्लिपरिंग मोटर को स्टार्ट किया जाता है तब, पूरा रेजिस्टेंस लाइन में होता है। धीरे धीरे रेजिस्टेंस कम होता है और मोटर स्पीड पकड़ती है।

 

ये पूरा ऑपरेशन रोटर रेजिस्टेंस स्टाटर के द्वारा ऑटो में होता है।

 

स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर का उपयोग

1 – जहा ज्यादा स्टार्टिंग टॉर्क की जरुरत हो वह उपयोग  है।

2 – जहा लोड स्थिर नहीं होता, वेरिएबल लोड में इसी इस्तेमाल किया जाता है।

3 – क्रेन, होइस्ट, कंप्रेसर, स्टील प्लांट मशीन में ज्यादा उपयोग होता है।

 

सिन्क्रोनस मोटर- Synchronous Motor In Hindi

 

What is synchronous motor – सिन्क्रोनस मोटर किसे कहते है।

सिन्क्रोनस मोटर इसे कहते है जो सिन्क्रोनस स्पीड पे घूमती है। याने जिस स्पीड से रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड घूमता है इसी स्पीड से ये मोटर घूमता है। इसकी स्पीड में किसी भी तरह का कोई वेरिएशन नहीं आता। ये लगातार एक ही स्पीड पे चलती है।

अल्टरनेटर और सिन्क्रोनस मोटर लगभग एक सामान है। अल्टरनेटर को हम सिन्क्रोनस मोटर की तोर पे चलाके मैकेनिकल लोड कनेक्ट कर सकते है।

मोटर के तोर पे चलाने के लिए स्टेटर में थ्री फेज पावर सप्लाई दी जाती है।

साथ में रोटर को Excitation के लिए DC सप्लाई दिया जाता है। स्टेटर के पोल बदलते है पर रोटर के पोल स्थिर रहते है। यदि एक्साइटर के द्वारा ये पोल मैच कर दिया जाये तो ये सिन्क्रोनस स्पीड से घूमने लगते है। और Constant स्पीड में बदलाव किये बिना एक ही स्पीड से ये मोटर चलती रहती है।

 

Synchronous motor -AC Motor In Hindi

सिन्क्रोनस मोटर का उपयोग  

1 – सिन्क्रोनस मोटर का उपयोग पावर फैक्टर इम्प्रूवमेंट के लिए किया जाता है। ज्यादातर हाई टेंसन लाइन के साथ और पावर प्लांट में होता है।

2 – जहा कांस्टेंट स्पीड की जरुरत हो वहा सिन्क्रोनस मोटर बहुत अच्छा ऑप्शन है। इसमें लोड के साथ भी स्पीड में बदलाव नहीं होता।

3 – इस प्रकार की मोटर की कार्क्षमता अच्छी होती है।

सिन्क्रोनस मोटर का गेरलाभ
  • सिन्क्रोनस मोटर सेल्फ स्टार्टिंग मोटर नहीं होती। इसे स्टार्टिंग के लिए बहार से DC सप्लाई देने पड़ता है।
  • जहा गति में बदलाव की जरुरत है वहा इस प्रकार की मोटर नहीं चल सकती।

 

मोटर से सम्बंधित इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवाल और जवाब

UPS क्या है ? कैसे काम करता है और UPS के प्रकार।

ट्रांसफार्मर के प्रकार कार्य एवम भाग

 

 What are the Different Between IE2 and IE3 Motor ?

अच्छी कार्यक्षमता (Efficiency) वाली मोटर एनर्जी सेविंग में बहुत बड़ा रोल अदा करती है। इसीलिए,अच्छी कार्यक्षमता वाली इलेक्ट्रिकल मोटर होना बहुत आवश्यक है। आज कल मोटर सिलेक्शन इंटरनेशनल नियमो के अनुसार ही किया जाता है। इसमें IE1, IE2 और IE3 जैसे ग्रेड दिये है।

IE इंटरनेशनल एफ्फिसिएन्सी फॉर लॉ वोल्टेज मोटर

 

निचे के कोस्टक में हम IE1, IE2, IE3 or IE4 मोटर में कितनी कार्य क्षमता ज्यादा है ये देख सकते है। और कितना एनर्जी सेविंग कर सकते है इसका कॅल्क्युलेशन भी कर सकते है।

              
 Motor Efficiency Chart

 

 

  • IE 1 – स्टैंडर्ड एफ्फिसिएन्सी
  • IE 2 – हाई एफ्फिसिएन्सी

मौजूदा समय में हमारे देश में IE2 से IE3 में कन्वर्ट हो रहे है।

  • IE 3 – प्रीमियम एफ्फिसिएन्सी
  • IE 4 -सुपर प्रीमियम एफ्फिसिएन्सी

 

UPS कैसे काम करता है ? प्रकार

बैटरी के प्रकार एवम उपयोग

आपको कोनसा AC लेना चाहिए

 

AC Motor In Hindi के इस आर्टिकल में AC मोटर की रचना, कार्य एवं भाग के बारेमे समजा। पर यदि आप इंटरव्यू के लिए तयारी कर रहे हो तो मोटर से सम्बंधित Interview Question के लिए यहाँ क्लीक करे।

By Admin

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